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ELECTRON ELECTRON REPULLESON BALANCE

प्रस्तावना (Introduction)परमाणु की संरचना को सामान्यतः नाभिक और इलेक्ट्रॉन के बीच आकर्षण बल के आधार पर समझाया जाता है। परंतु केवल नाभिकीय आकर्षण बल से न तो इलेक्ट्रॉनों की वास्तविक व्यवस्था को पूरी तरह समझा जा सकता है और न ही परमाणु की दीर्घकालिक स्थिरता को स्पष्ट किया जा सकता है।इस कमी को दूर करने और परमाणु संरचना को संतुलित दृष्टिकोण से समझाने के लिए Electron Repulsion–Balance Siddhant प्रस्तुत किया गया है।सिद्धांत का उद्देश्यइस सिद्धांत का उद्देश्य यह स्पष्ट करना है कि परमाणु की संरचना केवल नाभिक और इलेक्ट्रॉन के आकर्षण से नहीं बनती, बल्कि इलेक्ट्रॉनों का आपसी प्रतिकर्षण भी उतना ही महत्वपूर्ण होता है।यह सिद्धांत यह समझाने का प्रयास करता है कि इलेक्ट्रॉन किसी निश्चित कठोर पथ पर नहीं चलते, बल्कि वे उन क्षेत्रों में व्यवस्थित होते हैं जहाँ नाभिकीय आकर्षण और इलेक्ट्रॉन–इलेक्ट्रॉन प्रतिकर्षण के बीच संतुलन स्थापित होता है।मुख्य नियम (शब्दों में)इस सिद्धांत के अनुसार परमाणु के भीतर प्रत्येक इलेक्ट्रॉन पर एक साथ दो मूलभूत बल कार्य करते हैं।पहला बल नाभिक द्वारा लगाया गया आकर्षण बल होता है, ज...